Saturday, 7 March 2015

में उन सारे प्यारे सर्जको का सर जुका कर शुक्रिया अदा करता हु ..

आज सायद मेरा जी हलका हो जायेगा... 
जबसे इस तीसरे विश्वमे कदम रखा है ... 
में रोज कुछ ना कुछ नया शिख रहा हु... 
यहा तक की चोरी करना भी मेने यहा शिखा... 
हां किसीके चित्रों की चोरी ... 
लेकिन ऐसा करते वक्त  मुझे भीतरसे अच्छा नहीं लगता था 
दिल पर एक  बोजसा महेसुर करता था 

क्योकि किसीकी दिन ,महीनो , बर्षोकी महेनत का में -
मुफ्तमें इस्तेमाल  कर रहा था और तो कुछ में दे नहीं पाता हु . 
लेकिन कमसे कम उसका शुक्रिया तो अदा कर  शकता हु ... 
सो आज में करूँगा... 
शुक्रिया दोस्त तेरा और इस चित्रकारका बहोत बहोत शुक्रिया.... 

और अज्ञानी या अनंत नामके शब्दकारका भी ! शुक्रिया... 

जिसके चित्र और शब्दका मेने आज तक कई वार खुदके जझबात बया करनेके लिए इस्तमाल किया... 

उन सारे सर्जको का में  सर जुका कर शुक्रिया अदा करता हु....   

क्या अरुण तूने कभी ये सोचा है..? 

में सोचता हु..!  

और जब कभी में सोचता हु, तो मुझे ख़याल आता है, की.... , 

हमारे जझ्बातो को बया करना आज कितना आसन हो गया है... 

जब कभी हमारे पास अपने जझबात बया करनेके लिए शब्द नहीं होते,  

तब हम किसी और के शब्दका आसानीसे इस्तेमाल कर लेते है... 

( मै ने भी कई तसवीरों को चुराया है, 
हां बिना पूछे लेना उसे चुराया ही कहेते है... ) 

और हमारे भीतर होती प्यार, वफ़ा, ख़ुशी, गम, दु:ख, सुख, आनंद, परम 

आनंद, और भी बहोत कुछ अनुभव अनुभूतियाँ.....
  
पल पल हमारे भीतर हम ऐसे कितने सारे अहेसास महेसुस करते है...    

और फिर हमारे भीतर होती इन सारी अनुभूतियो को.....

किसी चाहने वाले के सामने बया करने के लिए हम जाने कितने सारे.......

कलाकारो के सर्जन का इस्तेमाल करते है.....

उसको बिना पूछे बिना उसका शुक्रिया अदा किये हम आसानीसे .....

उसका इस्तेमाल अपने जझबात बाया करने के लिए कर लेते हे.   

जब की  उन्होंने वो सर्जन रातभर जाग जाग कर किये होते है....

किसीके भी सर्जन के सर्जन की  नक़ल कर लेना बड़ा आसान होता है.  


जब की असल मे बहोत ही मुश्किल  ... 


पहेला सर्जन करनेके लिए उस सर्जकको ... 


दिन, रात , महीनो ,साल जागना पड़ता है    

तब जाके कुछ अच्छा ख़ासा प्यारा  और ....

दिल को छु लेने वाला  सर्जन होता है...दोस्त ..! 

और हम बे शर्म की तरहा उसे बिना पूछे  चुरा लेते है.. 


उठा लेते हे यहा वहा से बिना महेनत किये अपना नाम रोशन करने के 


लिए  और लोगो की वाह वाह पाने के लिए ..! 

में ये ठीक नहीं समजता ... 

हां मेने भी कई फोटू चुराए है पर तब वही में वो बोलके आया हु ... 

बिना जिजक की मुझे ये तसवीर अच्छी लगी हे सो में चुरा लेता हु .. 


 इस बातका प्रूफ कई जगा मिल भी जाएगा ..! 

हम चुरा लेते है बिना पूछे बिना शुक्रिया अदा किये...  

जेसे किसी शायर के शब्द..... 

किसी संगीतकार की धुन..... 

किसी गायक की गझल ....

किसी चित्रकार के चित्र....

और भी बहोत कुछ जो दुसरोका है ! हमारा नहीं ! 

फिरभी हम बे शर्म कितनी आसानी से ! उसे बिना पूछे ! 

बिना उसका धनयवाद किये  इतेमाल कर लेते है ....:( 

ये सारा सर्जन संगीत , शब्द, आवाज, चित्र  वगेरा वगेरा ...

बहोत ही बडा किंमती होता है ... 

खरीदने जाये तो पता चले की उसकी किंमत क्या हे ... 
लेकिन.... 

आज हमें आज बहोत ही असानिसे.... 

 यहा वहा से ये सारा कुछ बिलकुल निशुल्क, मुफ्त मिलाता है...

इस लिए सायद हमें उसकी कोई कीमत नहीं  करते .... 

और हम ये  शुक्रिया अदा ना करनेकी .... 

बहोत बड़ी गलती कर बैठते है.... :(     

वेसे उस कलाकार को तो  तब बड़ी ही ख़ुशी होती है...
(" लेकिन फिर भी..! " )

तब उसे बड़ा ही गर्व होता है.....
 ("लेकिन फिर भी..! ")

जब कभी उसके सर्जनका इस्तेमाल ....

कोई अपने जझबात बाया करनेके लिए करता  है....
(" लेकिन फिर भी.! ") 

और उसका वो सर्जन दूर दूर तक फैलता है ...
(" लेकिन फिर भी..! ")

तब उसे भी बहोत ख़ुशी और गर्व महेसुस होता है.....
(" लेकिन फिर भी..! ") 

आखिर सारे सर्जक खुद को और......

 खुदके सर्जन को दूर दूर तक फेलाना चाहता है. 

लेकिन..! 

मेरी नेकी और इमानदारी मुझे ये कहेती है की.... 

मुझे  उसका शुक्रिया सर जुका कर अदा करना चाहिए ... 

जिन जिन सर्जकोके सर्जनका ........
चित्रकारों के चित्रका फोटो ग्राफरो के फोटो का ...

मेने आज तक अनंत और अज्ञानी के शब्दोमे जान डालने के लिए.... 

 इस्तेमाल किया है... 

बे शक ! बे जिजक मुझे सर जुका कर उसका......

 शुक्रिया अदा करना चाहिए .... 

सो में उन सारे प्यारे सर्जकोका कबसे

कई दिनोसे सर जुका कर शुक्रिया अदा करता चाहता था ...:)

सो आज  मेने सर जुका कर किया .... 

मेरी बात ख़तम ... 

अंतमें उन सारे प्यारे नामी अनामी जाने अन्जाने सर्जको का...... 

में फिरसे सर जुका कर शुक्रिया अदा करता हु ..! 

हाश... 
आज मेरा जी हलका हो गया... 


पुरुषोंतमू .... ये नाम तो मेरे दद्दू ने रखा था.... 

आज कुछ चंद लोग उसे प्यारसे ... "और कुछ ..!!"

 अब जाने भी दो आखिर क्या रखा हे इन "और कुछ " में हां... :) 

Katira Paresh के नाम से जानते नहीं ! 

लेकिन फिर भी ..! पहेचानते है... :) :) :)
&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&&
थोड़े वक्त पहेले kunjal pradip chaya का एकाउंट डिलीट हु वा था...

आज अचानक मेरे प्यारे दोस्त अरुण शाह का फेसबुक एकाउंट हेक हो गया ...

ऐसा जब मेने उसे यहा नहीं पाया तो फोन लगाया ...

तब जाके उसने मुझे ये बताया...

ऐसा जब होता है तब सिर्फ उन्हें ही नहीं उनके दोस्तोको भी !

बड़ा ही नुकसान होता है...

क्योके खुदकी या उनकी पोस्ट पर हमने जो बाते की होती है ...

कभी कभी वो बड़ी महत्व की होती है....

लेकिन उनका एकाउंट डिलीट होनेसे उनके दोस्तोकी वो बाते वो यादे जो कभी फुरसत में

पढ़ते है तो हमारा दिल बहल जाता है बहोत सी बाते ऐसी भी होती है...

आज अरुण के साथ साथ मेरा भी बड़ा नुकशान हो जाता गर मेने उनका शेर किया हुवा चित्र.....

और उसके साथ मेने सर्जको को सर जुकाके किया हुवा शुक्रिया भी मिट जाता.... 

लेकिन ऐसा हुवा नहीं है, क्योकि इश्वर के आशीर्वाद से मुझे ये ज्ञान मिला ..

और फ़ौरन वो उनका शेर किया हुवा चित्र ....

मेरे इस कोने में आये इस खंडर पर महेफुझ कर लिया था ...

सो बच गया ...   :)

अब में अपनी ही इस अक्कल को अपने ही सामने सर...

जुका के ही नहीं ! बल्के  घुटनो के बल पे..!

शुक्रिया अदा करता हु आयने को  सामने रख कर...:) :) :)

अरुण तू फिकर ना करना यार ... :)



तेरा भी कुछ ना कुछ तो होगा ही... :) :) :)

No comments:

Post a Comment