में जब चाहू तब !जो चाहू वो ! यहाँ करता हु , कर शकता हु .
में अपने इस घर का रास्ता किसीको अपने मुह से नहीं बताता ....
हां कभी कभी जब मेरी मरजी होती हे में इस घरका टुकड़ा बहार ले जाता हु ...
फिर कोई अपने आप पता करके यहाँ आये ये बात और है .
गर कोई यहाँ आता भी हे . तो ,
ये मेरी निजी अलौकिक दुनियामें
आने वालोका में स्वागत करता हु .
ये मेरा छोटासा घर मेरा प्यारासा खंडर ...
कुछ ख़ास लोग ही आ पाते हे इसके अंदर ....
आप आये हे तू जरुर आप मेरे लिए ख़ास ही होंगे ...
मेरे चाहने वाले या मेरे यारो के लब्झोको चाहने वाले होंगे
यहाँ इस खंडर के भीतर आने के बाद ,
मेरा बहार की दुनिया से कोई वास्ता नहीं रहेता ...
यहाँ मुझे पुरे जहा का सुख -ओ सुकून मिलता है..
एक अलौकिक अहेसास....
मेरी ही तरहा....
आपको भी होना चाहिए यहाँ आने के बाद ...
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