😇
सारे के सारे अटके हुवे है कही ना कही...
आप ट्राफीक मे अटके है ये बात और है...
और फीर ये भूख भी...! 😇
भूखे सभी...
भुख सबकी...
एक जैसी होती नही...
और फीर....
भूख ही वजे दुखकी...
दुख ही वजे सुखकी...
और फीर ये खाना, पीना, जीना,,,
सीना खा जाती है ये जरुरते भी...
!
!
!
!
!
अब ईस गलती की सजा....
कुछ और सोचो,,,,
आह 'बाह'वाह वाह...
आम लोगान की भूख है...
अकले एवु बधु,
बोलवानी सख्त मनाई छे..!
फीर क्या हुवा...
खाना पीना हो गया...
क्षमा...
हम अन की मदद नै कर शकते.. 😇
कोक दि' मन मस्ती करे एमा मारो शु वांक..!
ईसमे कही थोरासा हम जुठ भी बोले है.. 😇


No comments:
Post a Comment