Monday, 11 July 2016

तेरी दुनिया से होक मजबूर चला ....




तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला

तेरी दुनिया से ...

इस क़दर दूर हूँ मैं लौट के भी आ न सकूँ
ऐसी मंज़िल कि जहाँ खुद को भी मैं पा न सकूँ
और मजबूरी है क्या, इतना भी बतला न सकूँ

तेरी दुनिया से ...

आँख भर आयी अगर, अश्क़ों को मैं पी लूँगा
आह निकली जो कभी, होंठों को मैं सी लूँगा
तुझसे वादा है किया, इस लिये मैं जी लूँगा

तेरी दुनिया से ...

खुश रहे तू है जहां ले जा दुआएं मेरी
तेरी राहों से जुदा हो गयी राहें मेरी
कुच नहीं पास मेरे, बस हैं खताएं मेरी

तेरी दुनिया से ...

अनंत अकसर ये गीत गाता सुनता रहेता था ... 

फिर एक दिन हर तरहासे परेशान अनंत घर छोड़ कर चला गया ...

इधर उधर भटका भटकता ही रहा ...

फिर अपनो के खारीर मजबूरन वापस आ गया ..

और फिर  एक दिन वो सचमे चला गया दूर बहोत दूर ....
आज भी जब कभी ,,,, 

मे ये गीत सुनता हु

रो पड़ता हु ...

ख़ैर ...

बस और कुछ नहीं कहेना मुझे ...

कहानी बहोत लंबी और दर्दनाक है....


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