એવું તે શું થયું ?? કે,
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પહેલા તો ટેરવાના સ્પર્શ માત્રથી ઝણઝણી ઊઠતું આખુય શરીર.
ને હવે ! આલિંગનમાં આખુય શરીર તોયે ઝણઝણે ના ટેરવું લગીર.!?
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પહેલા તો ટેરવાના સ્પર્શ માત્રથી ઝણઝણી ઊઠતું આખુય શરીર.
ને હવે ! આલિંગનમાં આખુય શરીર તોયે ઝણઝણે ના ટેરવું લગીર.!?
4 YEARS AGO TODAY
Tue, Aug 28, 2012
कुछ अजीबसी उल्जन ....
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जाने क्यु? आज कल हर किसीकी नजर रहेती हें हमारी हरकतोपे.
आखिर हम भी इंसान हें. नाता क्यु ना हो हमारा भी हसरतोसे.
आखिर हम भी इंसान हें. नाता क्यु ना हो हमारा भी हसरतोसे.
वो लोग बड़े शातिर हें. बड़े चालक हें.हम ठहेरे भोले.हम अन्जान हें.
हम तो जीते हें अपनी मस्तीमे. हम बे खबर हें उनकी हरकतोसे.
हम तो जीते हें अपनी मस्तीमे. हम बे खबर हें उनकी हरकतोसे.
हर वक्त इक अजीबसा सवाल छोड जाते हें. वो भी हमारी तरहा,
कहेना चाहते हें कहे नहीं पाते. दिलकी बात वो भी अपने खतूतोमे.
कहेना चाहते हें कहे नहीं पाते. दिलकी बात वो भी अपने खतूतोमे.
दर्द उनके दिलमे भी हें सायद कुछ हमारे जेसा.बतातेनेसे डरते हें या
लेते हें इम्तहान ? समजमे नहीं आता कुछ हें भी या हम हें धोखोमे.
लेते हें इम्तहान ? समजमे नहीं आता कुछ हें भी या हम हें धोखोमे.
कबतक छुपावोंगे दर्द अपना? हम जानतेहें दर्द हें आपके भी सिनेमे.
पता चल जाता हें तब जब आप आते हें सामने हस्ते हुवे मुखौटोमे.
पता चल जाता हें तब जब आप आते हें सामने हस्ते हुवे मुखौटोमे.
बड़ी मुश्किलसे छुटे थे हम प्यारके बंधनोसे उड़ते थे पंछीकी तरहा.
“अनंत”जाने क्या हुवा की फिर आज बंधने लगे हें. बे नाम रिस्तोमे.
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"अनंत" सन .. १९९९
“अनंत”जाने क्या हुवा की फिर आज बंधने लगे हें. बे नाम रिस्तोमे.
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"अनंत" सन .. १९९९





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