Thursday, 16 April 2020

વર્ષો પહેલા એકાંતે બેસી અનંતે લખેલી અધુરી રચનાઓ ...


વર્ષો પહેલા એકાંતે બેસી અનંતે લખેલી અધુરી રચનાઓ  ... 
ऐसे कुछ लोगो को मैने करीब से देखा है . 
बहोत करीब रहेने वालो से मैने ये जाना है.

 ज्यादा करीब रहेने वालो को मैने 
बहोत दूर होते हुवे देखा है .

और में नहीं चाहता की तू भी दूर हो जाए मुजसे. 
"अनंत" ईस लिए अकसर में दूर ही रहेता हु तुजसे. 

नजदीक हे वो जाने किस वजह से हो जाते हे मजबूर !
जिश्म से करीब रहेने वाले रूह से क्यों हो जाते हे दूर !

 फिर  "अनंत " मै खुद के साथ जीने लगा !
तू ना आई तेरा इन्तजार मैने बहोत किया !

पास पास ही थे जब तक हम साथ साथ न थे .
बहोत दूर हो गए "अनंत" करीब आने के बाद .

देखा है अकसर चाहने वालो को दूर होते हुवे बहोत करीब आने के बाद . 
कही हम भी दूर ना हो जाये "अनंत" ये सोचके ठहर जाता हु पास आते आते .

एक पल के लिए भी .!
पलक जबकाए बिना .
देर तक दूर तलक देखा !
तू दिखाई नहीं दी 
और फिर 
वापस लौट आई    
मेरी नजर 
निराश हो कर
में उदास आँखे बंध किये कोने में जा बेठा . 
तब जाके मेरी आँखों ने मेरे भीतर झांका . 
और "अनंत" मैने तुजे बहोत करीब पाया .  
"અનંત"
रात भर तुम्हारे बदन को मच्छर चाटे या काटे तो तुम्हे कोई एतराज नहीं !
मगर  हम "अनंत" जरा सा भी छुए तेरे बदन को तो तुम मुजे काटने लगती हो !

क्या में इसे तुम पर मच्छर के चाट ने काट ने का असर समजू ?

"अनंत"जो तुम मरे साथ मच्छर की तरहा पेस आने लगी हो .!

मेरा दर्द सुनके गर किसी आँख में आंसू आये , 

तो में समजू "अनंत" जजबात अभी जिन्दा हे .  

"अनंत"फडफडा जाता हे जरा सी आहट सुनके . 

बाद इश्क के दिल मेरा परिंदों सा हो चूका है.  
*****
तुम मेरी हो सिर्फ मेरी इस भरम में बहोत साल गुजर गए .
"अनंत" सास छूटने तक ये भरम रहेता तो अच्छा होता। 
****
इस जहा में मेरा तो कोई न था तेरे सिवा.  
तेरा भी कोई नहीं नहीं होगा मेरे सिवा .
बस ईसी भरम मे मै बर्षो जिंदा रहा . 
लेकिन वो तो सिर्फ मेरा भरम था . 
जो तूने तोड़ दिया और में टूट गया . 
 "अनंत"में तो जीते जी मर गया .
जो तुम्हे दुःख दे उसे भी तुम दुवा दो . 
दुवा ..!!? 
कैसे दू में दुवा.!? 
"अनंत"जो हुवा ठीक नहीं हुवा। 
जो तुम्हे दुःख दे उसे भी तुम दुवा दो। 
कहेने दो ऐसा कोई कहेता है तो, 
में इस्सान हु कोई साधू या संत नहीं. 
ना तो में इश्वर हु। 
और होता गर मे संत फिर तो मे 
साधू की भाती श्राप देता। 
 इश्वर भी है बदला लेता ?
क्या तुमने इश्वर को बदला लेते हुवे नहीं देखा ?   
क्या तुमने साधू को श्राप देते नहीं देखा सुना ? 
फिर भी तुम कहेती हो तो ठीक हे। 
में बद दुआ नहीं दूंगा 
लेकिन मै "अनंत "दुआ भी नहीं दूंगा। 
"अनंत"

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