Friday, 1 May 2020

घर

वर्षो पहले कुछ गीत सुने थे। 
अच्छे लगे थे बडे प्यारे लगे थे ।
फीर सोचा अब तो एसा हो सकता है।
जो पहले सीर्फ रेडीयो मे या ओडीयोमे
सुन सकते थे।
अब तो देख भी सकते है।
फीर जो सुना था सुनता था
उन गीतो को देखा।
और भी अच्छा प्यारा लगा।
मे कहुंगा तो क्या होगा।
जैसे मेरे खा लेने से
आपका पेट तो नही भरता ना।
सो देख लेना।
ये गीत सुनके कान खुश होते थे। 
देखा तो आंखे भी खुश हो गई। 
फीर सोचा अब तो घर देखना ही चाहीये।
कान खुश हुए आंखे भी खुश हो गई।
अब गर घर फील्म देखे तो पता चले।
रूह खुश होती है या नहीं।
सो देख रहा हुं।
फील्म "" घर"
*******
दिन में कुछ होओता हे
और रात मे कुछ होओओता है....

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