Saturday, 24 June 2023

उम्र भर नहीं मीटती

हां पण ... ऐ तो  शोधवु पड़े ने...! 

भाईबंध अनंत  कहेतो.... के... 

शोधे छे तेने अचूक रस्ता हजार  मले छे.... 

हर एक दिशा माथी नवा विचार मले छे.. 

"अनंत" लोको चित्र विचित्र होय छे अहि. 

पण कोइकमा मनने गमता चितार मले छे...! 

"अनंत" आ वात  वर्षो पहेला कही चुक्यो छे.... :)

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हम जब देर रात के  बाद मिलते तब बहोत सी बाते होती थी ... 

लेकिन वो फिर कभी... 

आज बस इतना ही ... काफी ...  

एक बार मेने अनंत से कहा ...

यार आज तू मुझे कुछ इन्सांकी भूख के बारे में बता 

तब उसने कहा देख परिया इनसानी भूख... 

कई और कई प्रकारकी होती है..!  

और वो सारी भूखे कभी ना कभी तो मिट ही जाती है ... 

लेकिन ....

दो भूख ऐसी भी हे जो उम्र भर नहीं मिटती .. 

मेने पूछा वो कौनसी भूख है अनंत जो कभी नहीं मिटती ..... ? 

तब उसने अपने नाम का बखूबी इस्तेमाल करते हुवे कहा ... 

उम्र भर मिटती नहीं :अनं....त"  ये दो भूख. 

एक प्रेमिकी इच्छा और दूजे प्रेमिसे हूंफ .....!

"अनंत"

पहेली लाईनमे अपने नामका बखूबी इस्तेमाल करके.... 

लंबा सा खिंचके उसने बड़ी सिफतसे कहे दिया की... 

सारी भूख एक तरफ प्रेम की भूख एक तरफ... 

हर किसीसे मिलती हूंफ एक तरफ और प्रेमी से मिलती हूंफ एक तरफ... 

सारी भुखो का कभी ना कभी तो अंत आता ही है लेकिन ... 

एक प्रेम है जिसकी भूख  कभी नहीं मिटती .. 

प्रेम की भूख अनंत है.... 

मेने पूछा ऐसा क्यों प्रेम की भूख ही क्यों अनंत.... ?

तो उसने कहा हर इंसान प्रेमही से तो पैदा होता है....

अब प्रेमसे पैदा जो हुवा वो प्रेम ही चाहेगा ना,, 

मैने कहा,  हां यार .....  

जो जी जानसे जुड़ा हो उसका अंत भला कैसा.... 

वो तो अनंत  ही होगा ना.... 

फिर उसने कहा.... 

प्रेम तो सभी से होता है... 

जन्मके साथ ही हमारा  जिन किसीसे भी रिश्ता जुड़ता है .... 

हम उन्हिसे प्रेम चाहते है, और उन्ही को प्रेम करते है.... 

लेकिन उसके वाद जब हम जवा होते हे,

तब कीसी अजनबी की तरफ खींचे चले जाते है..

मर्द ओरत के और ओरत मर्द के प्यार की तलास करने लगता है,

जो अजनबी हो... 

सबका प्यार एक तरफ और स्त्री और पुरुषका प्यार एक तरफ .... 

प्यारमे सिर्फ शारीरिक संबंध माइने नहीं रहेता .... 

बल्कि एक दुसरे की हुन्फ़ अहेम होती है...

बाकी जो घटना घटती है वो तो क्षणिक होती है ....  

ख़ैर प्रेम का या प्रेमकी बातोका कोई अंत नहीं है... 

अनंत एक प्रेम पुरुष है कोई साधू या संत नहीं है... 

अपने बारेमे इतना कहेके उसने मुझे कहा परिया .... 

रात बहोत हो चुकी है अब तू सोजा मुझे भी निंदसी आने लगी है.... 

उनका ये शेर मुझे बेहद पसंद है... 

उम्रभर मिटती नहीं "अनंत" ये दो भूख ..! 

इक प्रेमी की इच्छा और दूजे प्रेमी से हूंफ ..! 

इस लिए इसे बार बार दोहराना मुझे अच्छा लगता है...  

बस आज इतनाही ... 

बाकी कहानी फिर कभी.....:)

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