"અનંત" કાળથી ભટકતો "અજ્ઞાની"
आंखो मे ना झांकना कोई ....
क्यों कि,
"अनंत"
"अनंत" आंखे धोखा खा भी शकती है....
*ब्लास्ट*
आंखो मे क्या झांकते हो,
आंखे फरेबी हो शकती हे ।
झांकना है तो दिल मे झांको,
जहां से प्यार की लहेरे उठती हे ।
*श्री गुलाब दास की रचना *
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