Wednesday, 22 November 2023

एक पल

एक पल 

बीना जपकाये पलक

देर तक दूर तलक देखा 

तुं दिखाई नहीं दि 

फीर नजर थक कर वापस लौट आई। 

नीराश हो कर। 

कोने मे बेठ उदास आंखो ने 

मेरे अंदर झांका 

और तुं मील गई। 

फीर "अनंत" मै खुदके साथ जीने लगा। 

तुं ना आई। तेरा इन्तज़ार बहोत कीया।

*****

पास पास ही तो थे जबतक हम साथ न थे। 

"अनंत" दूर हो गये हम करीब आने के बाद। 

करीब आने के बाद कहीं दूर ना हो जाये। 

यही सोच कर "अनंत" हम पास नहीं आते। 

"अनंत" 

देखा है अकसर चाहने वालोको, 

दूर होते हुवे पास आने के बाद। 

कही हम भी दूर ना हो जाये 

ये सोचकर ठहर जाता हु मे

"अनंत" तुम्हारे पास आते आते। 

"अनंत" 



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