एक पल
बीना जपकाये पलक
देर तक दूर तलक देखा
तुं दिखाई नहीं दि
फीर नजर थक कर वापस लौट आई।
नीराश हो कर।
कोने मे बेठ उदास आंखो ने
मेरे अंदर झांका
और तुं मील गई।
फीर "अनंत" मै खुदके साथ जीने लगा।
तुं ना आई। तेरा इन्तज़ार बहोत कीया।
*****
पास पास ही तो थे जबतक हम साथ न थे।
"अनंत" दूर हो गये हम करीब आने के बाद।
करीब आने के बाद कहीं दूर ना हो जाये।
यही सोच कर "अनंत" हम पास नहीं आते।
"अनंत"
देखा है अकसर चाहने वालोको,
दूर होते हुवे पास आने के बाद।
कही हम भी दूर ना हो जाये
ये सोचकर ठहर जाता हु मे
"अनंत" तुम्हारे पास आते आते।
"अनंत"
No comments:
Post a Comment