एक भी पल
बीना जपकाये पलक
देर तक दूर तलक देखा
तुं दिखाई नहीं दि
फीर नजर थक कर वापस लौट आई।
तुं ना आई। तेरा इन्तज़ार बहोत कीया।
आखीर नीराश हो कर।
मै जाके एक कोने मे बेठ गया।
मेरी उदास आंखो ने मेरे भीतर झांका।
और तुं मुजे मील गई।
मील गई तुंं मुजे और फीर "अनंत"
मै तुम को अपने भीतर ही पाके,
खुश हुआ और खुद के साथ जीने लगा।
"अनंत"
*ब्लास्ट*
पास पास ही तो थे जबतक हम साथ न थे।
"अनंत" दूर हो गये हम करीब आने के बाद।
"अनंत"
करीब आने के बाद कहीं दूर ना हो जाये।
यही सोच कर "अनंत" हम पास नहीं आते।
"अनंत"
देखा है अकसर चाहने वालोको,
दूर होते हुवे पास आने के बाद।
कही हम भी दूर ना हो जाये
ये सोचकर ठहर जाता हु मे,
"अनंत" तुम्हारे पास आते आते।
अनंत"
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