Monday, 12 January 2026

તો પછી ,સવાલો કેમ કરો છો...?


"अनंत" फीर मेरा वांक नै काढना... 
गर डूब जाओ तूम देखते देखते....
"अनंत" 
*ब्लास्ट*
आंखों मे क्या झांकते हो।
आंखे फरेबी हो शकती हे।
झांकना हे तो दिल मे झांको,
जहां से प्यारकी लहेरे उठती हे।
"गुलाब दास"



તો પછી ,સવાલો કેમ કરો છો...?

અગર જો જવાબો સાંભળવાનુ

જીગર ન હોય ...હું એમ કૌ છું ..!

સવાલ કરીન ભાગી ગૈ ઈવડી ઈ

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पुजनीय गुलाब दासकी रचना....

आंखोमे क्या झांकते हो,

आंखे फरेबी हो शकती हे.

झांकना हे तो दीलमे झांको !

जहा से प्यारकी लहेरे उठती हे.

"गुलब दास"

*ब्लास्ट*

"अनंत" कौन कहेता है की मै हु अकेला। 

ठोकर मेरी गुरु, और मै ठोकर का चेला !

"अनंत"

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