"अनंत" फीर मेरा वांक नै काढना...
गर डूब जाओ तूम देखते देखते....
"अनंत"
*ब्लास्ट*
आंखों मे क्या झांकते हो।
आंखे फरेबी हो शकती हे।
झांकना हे तो दिल मे झांको,
जहां से प्यारकी लहेरे उठती हे।
"गुलाब दास"
![]() |
તો પછી ,સવાલો કેમ કરો છો...?
અગર જો જવાબો સાંભળવાનુ
જીગર ન હોય ...હું એમ કૌ છું ..!
સવાલ કરીન ભાગી ગૈ ઈવડી ઈ
https://www.facebook.com/share/1HFUBzK4XD/
https://www.facebook.com/share/p/16p6EYuPaz/
पुजनीय गुलाब दासकी रचना....
आंखोमे क्या झांकते हो,
आंखे फरेबी हो शकती हे.
झांकना हे तो दीलमे झांको !
जहा से प्यारकी लहेरे उठती हे.
"गुलब दास"
*ब्लास्ट*
"अनंत" कौन कहेता है की मै हु अकेला।
ठोकर मेरी गुरु, और मै ठोकर का चेला !
"अनंत"
https://www.facebook.com/share/p/17GyX53Gwp/




No comments:
Post a Comment