'यार आज तो कुचे मरी गयो.'
' केम शु थयु ?' अनंते पुछ्यु .
अरे यार अजाण्या गाममां भुलो पडी गयो . जवु तु क्या ने क्या नीकळी गयो . मारो तो आखो दीवस बगडी गयो.
'अरे ! घेल सफ्फा एमा शु आटलो उकळी रह्यो ,
मुर्ख तने माणता ना आवड्यु . नवु नवु जाणता ना आवड्यु .
तु केवळरस्तो ज नथी भुल्यो ! रस्तो भुलवा साथे भान पण भुली गयो . अने बीजु घणु चुकी गयो. ' ए एक सामटु घणु बोली गयो . अने थोडो श्वास लई. अंतमा बोल्यो .
"अनंत" क्यारेक,रस्तो भुली जवानो एक फायदो ए छे के
एनेक नवा रस्ता जाणवा मळे छे.
हु चुप चाप सांभळतो रहयो .
बधानी जेम , बाघानी जेम .
पछी एणे कह्यु. के ...
अजाणता भुल थवी ए मात्र घटना होय छे. ए कंईक शीखवी शके छे.
भुल थवी ए कोई पाप नथी !
कीन्तु ज्यारे जाण थाय त्यारे,
स्वीकारवाथी ईन्कार करवो ए अने फरी भुल ना थाय एनो ख्याल राखवो . थयेली भुलने सुधारवानो प्रयास ना करवे ए भुल थी पण महा भुल छे.
अने पछी अंतमा एणे कह्यु के ...
भुलवु ए भुल होय शके .
कीन्तु भुलमाथी कशु ना शीखवु ए मुर्खामी
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