વર્ષો પહેલાં...
ભાઈબંધ અનંતે સમાજમાં ઘેર ઘેર અનેક પરીવાર માં ચાલતા દોગલા એવં ધૃણાસ્પદ વર્તનથી વ્યથિત થઈ લખ્યું હતું કે,
बेटा गर बहु पे हाथ उठाये तो सास के रूप मे औरत मन ही मन खुश होती है और मुश्कुराती है।
और जब दामाद बेटी पे हाथ उठाये तो मां के रूप में वही औरत गुस्सा होकर हंगामा खडा कर देती है।
हालांकि औरत पे हाथ उठाने का हक्क कीसी भी मर्द को नहीं है।
"अनंत"
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