આ ખંડેરમા આવે એની હાલત આવી પણ થાય..!
"અનંત" ખરા અર્થમાં આનેજ પાગલપન કહેવાય..!
ખૈર...
વારંવાર મનાઈ કરવા છતાં, આ ખંડેરમાં સતત આવન જાવન કરતી એક યુવતીને, અનેક ને થાય છે એવો ભયંકર ભરમ થયો...
(જો કે એમાં મારો જર્રાય વાંક્ક નથી.)
ઐ ય મારી પ્રીય ચહીતીઓ...
તમને આંયાકણે આવવાની
હું અકલેજ ના પાડતો હૌ છું.
ખૈર...
પછી પણ કોઈ આંયા કણે આવીને દીલ ખોલીને મનની વાત કરી શકે અને એમ કરતાં તેનુ હર્દય હળવું થાય તો ભાઈબંધનુ આવવુ જવુ માત્ર નહીં બલ્કે આ ભવ સાર્થક થયો ગણાય...
અને પછી ભાઈબંધ કે'તો એજ કે આ ભવમાં આટલું ઓછું તો નજ કહેવાય...
અને હું કૌ છું કે,
આ ભવમાં આટલું તો બૌ કહેવાય...
Shabd 22 December 2013 at 04:29
Ek ahilya thi.. Pathar ban ke beech raah padi thiek shabri thi.. Ber main pyar ikattha karti rehti thiEk main thi..rab ke intezaar main Har dard sehti thiAb ek aas dikhi is khandar main.. Raam an to khola darwaza kelog ye na kaheek pagli thi jo yahan bhatakti thi....
pkatira22 December 2013 at 04:37
वो तो आपको यहां देखते ही पता चल गया की आप भी पागल है।
और आपने यहाँ आते ही आपने पागल होने का सबूत दे दिया ...
पगली कही की...:)
पगली नहीं तो और क्या ...?
दूनिया से बहोत दूर यहाँ ईस घने जंगल के बीच खंडर पर पागलो क से सिवा और कोई आता है क्या..!
खैर वर्षो पहले अनंत का लिखा ये शेर
*ब्लास्ट *
"अनंत" जो पागल होते है, वो ही यहां आते है।
या फिर यहां जो आते है, वो पागल हो जाते है।
अर्थात
जो पागल होते हैं वो यहां आते हैं
या आके यहां, पागल हो ही जाये है।
"अनंत"
जी..
आप से मै क्या कहु ?
आज मै कई सालो बाद बोल रही हुँ ..
कोइ गलती हो जाये तो माफी चाहती हुँ..
जो कुछ इन दिनों हो गया...इतनि सारी गलत फेह्मयाँ, सब उसके उतावले स्वभाव के कारण हैं. आप कतई बुरा ना मानियेगा.
और फिर उसके दिल में कुछ भी गलत नही..
उसका स्वभाव कुछ ऐस है कि..
झख्मों से भरा सिना है मेरा , हस्ती है मगर ये मस्त नझर..
इसकि वजह से सब उसे अपने अपने नझरिये से देख्ते है.
हाँ वह खुद आप के पास चल के आई...आपने नहि बुलाया..
आप ने तो आगाह भी किया, पर वोह सिर्फ मेरे लिये आई...
मैं सदियों से तन्हा यहाँ बैठी हुँ....और उसे अनन्त आप मैं, मेरी झलक दिखाई दी..
सच भी है...आशा अनन्त हैं....
और अनन्त आशा हैं..
अनन्त आकाश में अनन्त आशा है..
पर उसने ऐसा नही करना चहिये था...हम दोनो को मिलाने मे, उसकी और आपके दोस्त परिया की तु तु मैं मैं हो गयी...और होती चली गयी..
अब सब सुनिये ः-
और हम दोनो क सच सुनिये
हम दोनो कभी एक हुअ करती थी...एक जिस्म तो एक जान
वोह शरीर मेरा तो मै रुह उसकी..
उसकी हरकतो कि वजह से मुझे बडी तक्लिफ होने लगि...वह बहुत अजीब थी
ab suniye uski zubani.....
"मेरे पास सब कुछ है...हमेशां से रहा है...कोई झरुरत नही....फिर भि एक अधुरप...रुहानी अधुरप.....जो कई बार...बार बार...हर बार
पुरी करने की कोशिश में...मैं उलझ्ती गयी....कोई आता सुलझाने कि कोशिश करती...और उलझ जाती..
ये सिलसिला लम्बा चला...हर बार ठोकर से सिखने के बदले मैं और बडी गलतियाँ करने लगी..
मुर्ख ..मुर्ख होते है कुछ लोग...महा मुर्ख...
आशा ने बडा समजाया...
मैं मुर्खता करती चली...वह मुझे छोड गई...
जब तुम से..अनन्त तुम से मैं मिली मुजे आशा बहुत याद आई, उसकी बाते जैसे तुम्हारी झबां से दुबरा सुन रही थी मैं..
मुझे लगा मैं तुमको और आशा को मिला दु. शायद मेरे हाथों एक तो अछा काम हो !!
और इसके लिये...
आप तक पहूचने के लिये मैने परिया को सताया
मैने सोचा बस एक बार...तुम दोनो मिलो फिर मैं परिया को कभी तन्ग नही करुन्गी..
पर फिर मेरे साये...मेरे और परिया के बिच आये....
शायद मैं उसे दोस्त भी ना बनती...मुझे नही चहिये था कि मेरे साये अब मुझ पर या किसि पर भी आये...जैसे आशा ने कहा...मैं महा मुर्ख हुँ...
कोइ सफाई नहीं दुँगी..बहुत मैले है मेरे हाथ...
पर अफ्सोस परिया मुझे समज नही पाया..
मेरा उतावलापन...मेरा बावलापन...उसे मैं अजीब लगती..
वह सोचने लगा सब कुछ होते हुए मैं क्युं भटक रही हुं..
परिया दिल क सोना है सोना...पर मुझे समझ्ना शायद मुम्किन नहीं..
पर मुझे अपेक्षा भी नही थी...मुझे सिर्फ तुम दोनो को मिलाना था..
मैं अन्धेरा हुँ, आशा उजाला है..
पर मेरी वजह से अब वोह भी मुझ्से रुठी है..
मैं आप सब की अनन्त, अज्ञानीजी, परेशजी...सब की माफी चाहती हुँ..
मैं अपनी गलतियों के साथ युंही भटकती रहूंगी...
आशा को रब की तलाश है...पर अब उसे कोई दुसरा शरीर ढुंढंना होगा शायद >>
मैं आप से येही मदद चाहती थी...
शरिर की गलतियो की सझा रुह को ना मिले..
मैं कतई उस पिंजरे के करीब भी नही आउंगी...मुझे पता है वहाँ सिर्फ रुह को प्रवेश है...
मुझे मेरे हाल पे रेह्ना होगा...
पर ये आशा...ये रुह कुछ ढुढं रही थी मेरे झरिये...
पर अब उसे कोई दुसरा शरीर ढुंढंना होगा शायद >>
khandar dekh kar muje laga ki yehi aasha ki sahi khoj ka ant hoga.."
main maha murkh !!
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