जो राह चुनी तुने, उसी राह पे राही चलते जाना रे
हो कितनी भी लम्बी रात, दिया बन जलते जाना रे
कभी पेड़ का साया पेड़ के काम न आया
सेवा मे सभी की उसने जनम बिताया
कोई कितने भी फल तोड़े, उसे तो है फलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
जीवन के सफ़र मे ऐसे भी मोड़ है आते
जहां चल देते है अपने भी तोड़ के नाते
कही धीरज छूट न जाये, तू देख संभालते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
तेरे प्यार की माला कही जो टूट भी जाये
जन्मो का साथी कभी जो छूट भी जाये
दे देकर झूठी आस तू खुद को छलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
तेरी अपनी कहानी यह दर्पण बोल रहा है
भीगी आंख का पानी, हकीकत खोल रहा है
जिस रंग मे ढाले वक़्त, मुसाफिर ढलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे.....
हो कितनी भी लम्बी रात, दिया बन जलते जाना रे
कभी पेड़ का साया पेड़ के काम न आया
सेवा मे सभी की उसने जनम बिताया
कोई कितने भी फल तोड़े, उसे तो है फलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
जीवन के सफ़र मे ऐसे भी मोड़ है आते
जहां चल देते है अपने भी तोड़ के नाते
कही धीरज छूट न जाये, तू देख संभालते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
तेरे प्यार की माला कही जो टूट भी जाये
जन्मो का साथी कभी जो छूट भी जाये
दे देकर झूठी आस तू खुद को छलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
तेरी अपनी कहानी यह दर्पण बोल रहा है
भीगी आंख का पानी, हकीकत खोल रहा है
जिस रंग मे ढाले वक़्त, मुसाफिर ढलते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे.....
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