उस दिन जब में सूबे सूबे खंडर पर गया तो बहार से मैने सुना
अंदर ये गीत बज रहा था
थोड़ी सी जमी थोड़ा आशमा
तिनकोका बस इक आशिया
https://youtu.be/5UE5iK4dyHs?si=FI59RxGCpi3kq0kT
फिर मै खंडर के अंदर गया तो मैने देखा
खिड़की के पास बैठा अनंत खुल्ले आशमा को तक रहा था !
में जब भीतर गया तो मैने सुना
अनंत बस इतना ही बोला
और जीने को क्या चाहिये !
आज फिर वोही गीत मेरे कानो से जब टकराया तो
मुजे वर्षो पहले का पूरा का पूरा माहौल
और अधूरा अनंत याद आ गया।
आखिर यही तो होता है , जीवनका आखरी सपना ,
हर किसीका ...
थोड़ी सी जमी थोडा आशमा हो !
तिनाकोका बस इक आशिया हो !
वेसे यहाँ इस खंडर में ,
मेरे सारे सपने पुरे होते है..
यहाँ मेरे और मेरे यारोकी पुरानी यादो और बातो के सिवा कोई नहीं होता....
गर और कोई होता भी है, तो होता है मेरे साथ मेरे पास मेरा अपना ...
एक अलौकिक सपना ...
युही ये गीत मुझे अच्छा नहीं लगता .
अच्छा इसलिए लगता है की अनंत भी कभी ये गीत गाया गुनगुनाया करता था...
एक और बात वेसे कोई मानेगा तो नहीं , लेकिन ये सच है . बिलकुल सच !
की ईसी तरहा अनंत के पास एक गमछा हमेशा रहेता था.
कभी सर पे बाँधा हुवा तो कभी गले में लटका रहेता था ...
क्योकि कड़ी महेनत आग ,और कोयले से जुड़ा हुवा काम ...
पूरा का पूरा बदन पसीने से चमकता ..
और चहेरा भी उसका पसीना पसीना ..
और चहेरे से लगातार बहेते पसीने को पोछने के लिए एक गमछा -
वो हमेशा अपने पास रखता था ....
काम करते करते गाना ...
गाते गाते काम करना ...
महेनत करते करते ,ऐसे वैसे हँसी सपने देखना ...
और बस हसी सपने देखते देखते महेनत करना...
बस यही उसकी मस्ती थी वो ऐसे ही अपनी मस्तीमे जीता था ...
एक दिन मेने अनंत से पूछा ...
यार , अनंत ! तू अक्सर सपनोमे ही क्यों खोया रहेता है ?
तो वो बोला, यारा तभी तो ये महेनत का काम हो शकता है...
मेने कहा ,
अनंत लेकिन तेरे आसपास तो धुवा धुवा और आग ही आग है...
उसने कहा ..
परिया ऐ धुवा धुवा और आग आग ये सब बहार की बात है ...
मेरे भीतर ,मेरी कल्पनामे , और मेरे सपनों में तो बस ...
लहेरता हे ठंडी ठंडी हवा का झोका और बाग़ ही बाग़ है ....
फिर मैने पूछा क्या अनंत तुजे लगता है की ,
कभी तेरा सपना ,जो भी हे वो पूरा होगा !
उसने बड़े बे फिकर होके , बे फिकराई से मुझे जवाब दिया ...
होगा तो होगा नहीं होगा तो नहीं होगा !
मेने कहा लेकिन अनंत सपना तो आखिर सपना ही होता हे ना !
वो भोला धीरेसे बोला, तो क्या ! नहीं देखने चाहिए सपने ?
मेने कहा , ऐसा नै लेकिन ...
मेरी बात पूरी सुने बिना वो बोला , लेकिन वेकिन कुछ नहीं परिया ...
सपने देखने के कहा पेसे लगते हे, मुफ्त में ही तो होते है ...
मेने कहा वो तो ठीक है अनंत तेरी बात सही हे , पर...
वो जेसे मेरी ना बोली बात को समज गया हो ...
ऐसे बोला. में जानता हु परिया तू क्या कहेना चाहता है ...
तू यही कहेना चाहता है ना की मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता ...
मेने कहा हां अनंत में वही कहे रहा हु ...
तो सुन परिया ,में भली भाती जानता हु की मुफ्त में इस जहा में ,
कुछ , कुछ भी नहीं मिलता ...
यहाँ तक की सपने देखने की भी बहोत भारी कीमत चुकानी पड़ती हे...
क्यों की ,
जब वो टूट जाता है ...
सब कुछ लुट जाता है ...
मेने कहा . फिर क्यों तू देखता है सपना अनंत ?
जबकि तू जनता है कीमत उसकी कभी तो चुकानी पड़ेगी ...
फिर, वो भोला ,बे फिक्र होक बोला , तब की तब देखि जायेगी मेरे भाई....
और इसके सिवा हमारे पास कोई चारा नहीं होता
जब तक की जीवनमे कोई प्यारा हमारा नहीं होता ...
"अनंत " सपने में हम अपनी दुनिया बसाते है...
सपने में ही हम किसी हसी को अपना बनाते है ...
और सपने में ही हम उसीके साथ रोते,हस्ते,गाते है..
जब तक की जीवनमे कोई प्यारा, सचमे हमारा नहीं होता ...
"अनंत" तबतक सपने देखे बिना हमारा गुजारा नहीं होता ...
इतना बोलके फिर ...
अपना मुह मेरे कानके पास लगाकर अनंत धीरे से बोला,
और में ये भी जानता हु परिया की...
"अनंत"सपने जब टूटते हे ना ! तब आवाज नहीं आती !
और फिर एक अच्छा ख़ास आदमी टुटके बिखर जाता है..
मेने कहा फिर क्यों तू बिखरना चाहता है ...
हस्ते हुवे बोला "अनंत" बड़ा मजा आता है...
और फिर अंत में एक सवाल मेने अनंत से पूछा ...
अनंत ये तू मुजे ये बता
अनंतने कहा क्या ?
मैने पूछा क्या अनंत सपने पुरे होने चाहिए ...
तब फिर वो धीरे से बोला ...
सपना कभी भी पूरा ना हो तो ही अच्छा है .
क्योकि सपने में मरने जीने में बड़ा मजा है .
कुछ सपने जब अधूरे रहेते है .
तब टूटकर भी हम पुरे रहेते है .
और कुछ सपने पुरे होने के
बा वजूद हम अधूरे रहते है
इतना कहे के आगे अनंत ने कहा
"अनंत जब सपना पूरा हो जाता है ..
सच मनो तो बहोत बुरा हो जाता है ...
में उनकी आखरी बात समज नहीं पाया था , बर्षो पहेले भी !
और आज तक भी, मुझे उसकी वो वात समजमे नहीं आई ...
जब की पुरे जहा के लोग सपना पूरा करने की और होने की सोचते हे ,
और अनंत ने कुछ और कहा !
अनंत ने कहा की सपना कभी पूरा ना हो तो ही अच्छा हे ..
मेरी समज में ये नहीं आता की दुनिया के लोग या अनंत...
इसमें से कौन जूठा है और कौन सच्चा है..
उस दिन मैने उसे कहा भी की यार अनंत तेरी ये उटपटांग बाते
मेरी समजमे नहीं आती !
तब मेरी बात को टालते हुवे आखिरमे अनंतने बस इतना ही कहा था
चलो छोड़ो इन बातो को आखिर क्या रखा है
इन बातो में , हां ...!
में भी तो देखता हु ऐसा इक हसीन सपना !
तुम भी वोही देखो ना ...!
वो बड़ा ही बे फ़िक़्र था !
https://youtu.be/9xsiYMX24LY?si=7tBg2vjiLzuXEIck
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