"अनंत" उन का आसपास होना ही काफी था।
दूर ही सही रूह से रूह को छुना ही काफी था।
फिर न जाने वो वक्त कहां खो गया।?
फिर न जाने वो शब्द कहां खो गया।?
दूर ही सही उनका होना ही मेरे सुने दिल को सुकून देता था।
उसकी आंखों मे अजीब सी चमक थी।
उसकी बातो मे अजीब सी खनक थी।
उनकी सांसो मे अजीब सी महक थी।
दूर ही से छु लेती थी जो मेरी रूह को।
"अनंत" जाने वो शख्स कहां खो गया।?
*બ્લાસ્ટ*
फिर न जाने वो वक्त कहां खो गया।?
फिर न जाने वो शब्द कहां खो गया।?
फिर न जाने वो वक्त कहां खो गया।?
"अनंत" जाने वो शख्स कहां खो गया।?
देखते ही "अनंत" झनझनाहट सी होती थी,
पुरे बदन मे। शख्स वो मस्त कहां खो गया।?
"अनंत"


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