आज कई दिनों के बाद , फिर में अपने आत्म सखा "अनंत" के.
फटे पुराने अस्थि पिंजर यानी उनके लिखे कागज़ को हाथो में
लिए बैठा हू.
और उन्हिमेसे कुछ ऐसी रचनाये ढूँढ ढूँढ
के लिखता हू जिसे पढके जिनेका होसला बढे जो रचनाये बर्षो पहेले उसने लिखी थी ....
उन्हिमेसे देख देख ये लिख रहा हू, उसने लिखा हें...
"जिंदगी"
जिंदगी पझल हो तो जिनेका मजा है...
जिंदगी गझल हो तो जिनेका मजा है...
सब सही हो ये मुमकिन नहीं जिंदगीमें,
हां कुछ गलत हो तो जिनेका मजा है .
रोज मीठा खावोगे तो बीमार हो जावोगे.
थोडा कड़वा सहद हो तो पीनेका मजा है.
ये अहेसास भी अलौकिक चीज
है."अनंत"
वो अहेसास भी गजब हो तो जिनेका मजा है.
***********"अनंत"***********
आसान जिंदगी तो आम लोग भी जीते है.
जिंदगीको कुछ हटके खास लोग ही जीते है.
और ऐसा अगर हो, तो ही जिनेका मजा है..
ब्लास्ट:-
"अनंत" बड़ी मौज उसीमे है. कुछ हटके हम जिए...
सीधी सरल जिंदगी तो आम इन्सान भी जीते है ...
"anant"
कभी रंगीन तो कभी बड़ी गमगीन होती है .
कभी कडवी तो कभी बड़ी नमकीन होती है .
"अनंत" मानाकि ये जिंदगी बड़ी कठीन होती है .
लेकिन जीतनी कठिन उतनी ही हसीन होती है .
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