.... फिर सुबह हुई और तूने कुछ पल में बहेला फुसला कर मना लिया मुझे ....
पर कल तेरी धुत्कार की वजेसे में रात भर रोया उसका क्या...?
"अनंत"
और कुछ तो माँगा न था, पास तेरे
ना और कुछ चाहा था कभी सिवा इसके ....
की रात में तू कुछ पल आये पास मेरे ....
"अनंत"
"अनंत"सोचा था कभी ना मिलूँगा अब में तुजसे .
पर क्या करू एक पल भी रहा ना गया दूर मुजसे.
"अनंत"
"अनंत" सोचा था तू मुजसे दूर जाए उससे पहेले दूर कही में तुजसे चला जाऊ ...
और फिर जो सोचा था वही मेने किया ..
'अब ना मिलुगा में कभी तुजे '
ऐसा बोल तो दिया...
मगर फिर बहोत रोया में रात भर....
"अनंत"
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