સાચે, હ્રદયની ઝણ ઝણીમાં જબોળી કલમ લખું છું હું.
તેથી પ્રિયે એ વાંચતાં જ આખે આખી ઝણ ઝણે છે તું.
આલિંગનમાં આવતા તો "અનંત" કેટલુંય ઝણ ઝણશું
હાલ તો ઝણઝણાવે છે, મને માત્ર તારા ટેરવાનું સ્પર્શવુ.
"અનંત"
*ब्लास्ट *
जीतनी जिंदगी उतनी लंबी लेकिन फिर भी
"अनंत" के जीवन की सबसे छोटी रचना ...
जिसका जो शीर्षक है वही हे कविता ....
और जो कविता है, वही हे इसका शीर्षक ...
सायद ये दुनियाकी सबसे छोटी रचना है....
जिसके आस पास बहोत पली बड़ी बनी घटना....
और लंबी लंबी कहानी ...
ये रही "अनंत" की वो दूनियाकी सबसे छोटी रचना ....
जिसका शीर्षक है ..... "स्त्री"
और कविता भी ....... "स्त्री"
"अनंत" ये "स्त्री" भी कवितासे कुछ कम तो नहीं होती ....
बल्कि सर से पाँव तक पूरी की पूरी कविता होती है " स्त्री"
"अनंत"
जीतनी जिंदगी उतनी लंबी हे लेकिन फिर भी .!
"अनंत" जीवन की सबसे अद्रभुत रचना हे स्त्री ..!
"अनंत"
*સ્ત્રી*
ઝણણ ઝણણ
ઝણ ઝણ ઝણ ઝણ...


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