एक लडकी सीघी सादी भोली भाली ...
अपने आपमे खोई हुई ....
अचानक गाने लगी गुनगुनाने लगी ....
ऊसके चहेरे पर....
अजीबसी रोनक नजर आने लगी...
होता है , ईश्क मे एसा ही ! होता हे !
जी भरके हसने वाला बादमे....
उनकी यादमे रोता है !
हां ! ईश्क मे ऐसा होता हे ...
एसे ही कुछ हालात ईघर भी थे उघर भी .....
तब जाके उसने उनसे कहा था...
तेरे ये तेवर-ओ हालात देखके
मुजे ये महेसुस हुवा हे !
की कीसी पागल ईन्सान ने
तेरी रुह को हलके से छुवा हे...
"अनंत" ओस का मौसम जैसे
बस घुवा घुवा घुवा घुवा घवा घुवा हे..
ये बात कभी अपनी चहीती से ,
मेरे यार ने कहीथी ....
वो कीस्सा लो ! अब खतम हुवा ....:)

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