इक दिन वो बहता खून असर उस पे कर जाए...
इंसान जिन्दा हो जाए शैतान मर जाए...
में जानता हु वो भी हिसाब हे और ये भी ! स...ब,
हिसाब हे ....
में भी और ये भी सायद हिसाबका एक छोटासा
हिस्सा...
मुझे बस उमीद इतनिसी हे की ये प्रार्थना ....
उन
लोगोकी की रूह को छु आए...
और इक दिन उन्होंने जो बहाया हे वो बहता खून...
असर उस पे कर जाए...
Allah Karam Karna Maula Tu Reham Karna ..
मेने इस प्रार्थना में अपने आपको सामिल कर
दिया हे ...
में खुदमे कुछ रूहानी महेसुस कर रहा हु...
इस प्रार्थना में सब कुछ समजा दिया गया है
....
इससे आगे , इसके आगे, मुझे अब एक भी !
लाबझ लिखने या बोलने की जरुरत महेसुस नहीं होती
...
हम सबको नेक राह चलाना मेरे अल्लाह
बंदोको बुराइ से बचाना मेरे अल्लाह
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना
इक वाकया सुनाता हूँ मैं अपनी ज़ुबानी
अपने बड़ो से मैंने सुनी है ये कहानी
रहता था किसी शहर में इक ऐसा भी इंसान.
जो नाम का मुस्लिम था मगर काम का शैतान
जालिम को जोर ऐ बाजू पे अपने गुरुर था
यानि की बेखुदी में खुदा से वो दूर था
सब लोग उसे कहते थे जल्लाद सितमगर
मासूमों की फरियाद का उसपे न था असर
जो वादा उसने कर लिया वो करके दिखाया
पैसों के लिए क़त्ल किये खून बहाया
इक दिन वो बहता खून असर उस पे कर गया
इंसान जिन्दा हो गया शैतान मर गया...
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना ..
इमान जिसे कहते है फरमाने खुदा है.
कुरान के हर लफ्ज में उसकी ही सदा है.
अल्लाह ने बख्शी है जो इमान की दौलत
इन सबसे बड़ी चीज है इंसान की दौलत
सोये हुए दिलों को जगाता है ये ईमान
भटके हुओं को राह दिखता है ये ईमान
ईमान की गर्मी से पिघल जाते हैं पत्थर
इस नूर से बनते है संवरतें हैं मुकद्दर
जो सबसे प्यार करता है इंसान वही है
मुस्लिम है वही साहिबे ईमान वही है
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना
अल्लाह की नजरों में वो होता है सुर्खरू
ईमान में क्या क्या न सहा प्यारे नबी ने
क्या ऐसी मुसीबत भी उठाई है किसी ने
करबल के शहीदों ने सबक हमको पड़ाया
सजदे में देके जान को ईमान बचाया
इस राह में जो सहते हैं तकलीफों मुसीबत
इक रोज उनपे होती है अल्लाह की रहमत
इंसान है वो जो दूसरों का दिल न दुखाये
पड़ जाए अगर जान पर तो जान लुटाये
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना
जिस काम के करने पे न हो राजी कोइ दिल
वो काम भी इस दुनिया में नफरत के है काबिल
जो कुछ भी जुबाँ कह दे इकरार नहीं है
लर्जिश है लवों की वो गुनाहगार नहीं है
जो दिल से नहीं करता बुराई का इरादा
अल्लाह से वो तौबा करे तोड़ दे वादा
जल्दी जो संभल जाये वो नादान नहीं है
ईमान जिसमें हो वो बेईमान नहीं है
दुनियां में हमेशा तो नहीं रहता अँधेरा
'
इन्सान जहाँ जागे वहीं पर है सबेरा
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना...
अल्लाह करम करना मौला तू रहम करना......
आमीन....
No comments:
Post a Comment