- Think Positive 

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- जनाब एसी बाते लीखने बोलने कहेने सुनने मे बहोत अच्छी लगती है।मै कुछ ऎसी हकीकत बया करूगा जीसे सुन पढ के सायद आप भी अपनी ये सोच और वीचार बदलने पर मजबूर हो जायेंगे।
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- वो बात बताने से पहले मे कहुंगा की एसे अच्छे विचार शैर करने वाले को एक बार अपने गीरेबां मे झांक कर सोचना चाहिए की,क्या उसके बारे कीसीने यु ही गलत सोचा था?अगर उसने गलत सोचा था तो क्या उसके बारे मे गलत सोचने वाला सही मे गलत था?क्या एसा वो खुद साबीत कर शकी है।?क्या वो खुद के बारे मे गलत सोचने वाले को गलत साबित कर शकती है।और वो गलत नहीं थीएसा साबित कर शकती है?अगर नहीं तो,क्या वो खुद गलत थी वो स्वीकार शकती है।?
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- अगर नहीं तो खुदके बचाव मे एसी बाते शैर नहीं करनी चाहिए।अब जनाब जरा इस बात पर गौर फरमाईयेगा।उस औरत के बारे मे जो ट्रक के पीछे जगह होने के बावजूद ड्राइवर के पास बैठी बे शक्क उस पर भी ठीक वैसै ही शक करना कोई गुनाह नहीं जीस हालात मे मेरे यार ने अपनी औरत पर शक कीया।क्या पता वो औरत आगे चलके सडकपे कही सुमसाम जगह आते ही मौका पाते हैं ही उस ट्रक ड्राइवर के साथ सो भी गइ हो।हालात को मजदे नजर रख के कोई ऐसा सोच भी ले तो ये कोई गुनाह नहीं।जनाब ये मे इस लीये कहे रहा हु की कुछ ही अर्से पहले मेरे दोस्त के जीवन मे कुछ एसी ही घटना घटी है।वो कहानी भी बताउंगा लेकिन उससे पहले मै ये कहेता हु जनाब कीआपकी ईन बातो का कोइ अपने झुठे बचाव के लीये भी इस्तेमाल कर शकता है। और कोई कर भी रहा है।लेकीन सोचने वाले की इसमे क्या गलती है।ये बात सही है मे भी मानता हूं।लेकीन मेरे दोस्त पे कुछ अर्से पहले जो बीती है।उसके बाद मे ये कहेता हुं की भरोसा जरूरी है।लेकीन अंधा भरोसा कीसी पर भी नहीं करना चाहिए।बेशक्क शक भी करना चाहिए जब हालात कुछ संगदीग्ध नजर आये तब शक करना ही चाहिए।एसा वो यार्र भरोसा तुटने के बाद समजा है।
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- और मुझे कहेता है।आज तक मेरा यार उसी सदमे मे जी रहा हे।और बार बार खुदसे और मुजसे ये कहेता हे।आखीर क्यो उसने मेरे साथ ऐसा कीया?जीस पर मै खुदसे भी ज्यादा भरोसा करता था।यार्र क्यो उसने मुजसे इतना बडा धोखा कीया?जीसे अपनी औरत पर खुदसे भी ज्यादा भरोसा था।कभी उसने अपनी बीवी से बहार कहीं आने जाने से नहीं रोका था।कभी देर हो जाती तो युही देर होने की वजे पुछता था। लेकीन शक के नजरिए से कभी पुछता नहीं था। इतना भरोसा था की कभी कोई यार दोस्त कहेता भी की,यार्र रमेश तेरी बीवी हर कीसी से हस हस कर बात करती है। तु कुछ कहेता क्यो नही?क्या तुजे अपनी बीवी के ईस तरहा के व्यवहार पर कभी शक नहीं होता।तब मेरा यार्र बडे फक्र से जवाब देता था की।
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- हस के बोलना उसका स्वभाव है।तुजे गर तुजे एसा लगता है की मेरी बीवी चालु औरत है तो एक बार उनसे तु गलत तरीके से पैस आ। फीर देख दो जापट लगाती है या नहीं।रमेश को अपनी बीवी पे इतना भरोसा था की अपनी बीवीका फोन भी कभीचेक नहीं करता था।गर कभी फोन रमेश के पास हो ओर बीवी के दोस्त का फोन आये तो भी अपनी बीवी को दे कर कहेता था। ले प्यारी तेरे दोस्त का फोन है।इतना भरोसा करने कां अंजाम ये आया की बीवी ने रमेश के अंधे भरोसे का गलत इस्तेमाल कीया।वीश्वास घात कीया।उसके बाद भी रमेश ने बडा दिल रखके अपनी बीवी को माफ कर दिया। क्यु की रमेश अपनी बीवी को बे पनाह मोहब्बत करता था।और आज भी करता है।लेकीन वो आज भी वो खुद भरोसे के लायकहैऊ एसा साबित नहीं कर शकी।आज भी मेरा दोस्त रमेश उसके बगैर खुद को आधा अधुरा महसुस कर रहा है।लेकीन उसकी घमंडी बीवी अपने गलती को स्वीकार ने सुधारने के बजाय पूरे परिवार को छोड़ कर अपने आप को सही साबित करने मे जुटी है।मेरा यार सिर्फ इतना ही चाहता हे उसे अपनी गलतीओका अहेसास हो जाये ।परिवार ओर पति के प्यार का मतलब समाज आ जाए ।रमेश का प्यार उसे उह से महेसूस हो जाए ।पूर्ण समजदारी ओर समर्पण का भाव उसके भीतर जब प्रकट हो जाएगा ।मेरा यार सब कुछ भूल के भुला के उसे फिर सिने से लगाएगा ।मन साफ तो सो गुनाह माफ ।जनाब फीर आगे क्या हुआ बताने की जरूरत नहीं। क्योंकि आप समजदार है।
*ब्लास्ट*चाहे कीतने भी करतब करो।सच हो या जुठ कभी छीपता नहीं।सब जानता है सब देखता है।वो रब जो कभी दिखता नहीं।- Like
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