हम जिन के वास्ते थे तमाशा बने हुए
देखा तो वो नहीं थे तमाशाइयों में भी
- जमील मलिक ❤️
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=5038277036288473&id=100003186787585
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2729440657165618&id=100002991311961
વર્ષો પહેલાં ભાઈબંધ અનંતે એની કોઈ
તેનાથી અને પોતાનાથી અનજાન એવી ચહીતીને...
એક શબ્દ નો વારંવાર ઉપયોગ કરી
બે અર્થમાં કહ્યું /લખ્યું હતું કે,
जान तो लेगी ही तुं भी कभी।
"अनंत" चाहता हूं मे तुं जान ले अभी।
मै बे जान।
है तुं जान।
जान ले।
जान लेगी।
तुं भी.!
जान लेगी.!
आज नहीं तो कल
कभी तुं भी जान लेगी।
जब जान लेगी।
तब तडपेगी पल पल।
दिल-ओ-दिमाग मे होगी हलचल।
जब कभी तुं जान लेगी।
"अनंत"
तुं आदत है मेरी।
और आदत
कोई भी हो।
आखीर है जान लेती ।
क्या तुं भी जान लेगी?
जान लेगी हां जान ही लेगी
तुं, मुजे पता है।
तुं भी जान लेगी ।
पता नहीं
जान
जाने से पहेले या
जाने के बाद
सुन जान
जाने से पहले जान ले।
या ले जान जाने के बाद।
पहेले जान ले "अनंत" पायेगी।
फिर आयेगी रहे जायेगी "अनंत" याद।
"अनंत"
વર્ષો પહેલાં...
ઓલાએ ઓલીને કહેલી એજ રચના...
"अनंत"
વર્ષો પહેલાં...
ઓલાએ ઓલીને કહેલી એજ રચના...
No comments:
Post a Comment