इसे क्या नाम दु ?
आके ना जा पावोगे . जा के ना आ पावोगे .
जितना दूर जावोगे . उतना पास आवोगे.
आके ना आ पावोगे जाके ना जा पावोगे ,
आधे खुल्ले दरवाजे के अंदर हम नहीं जाते.
आयेगे अंदर जब कभी तुम पूरा खुल जावोगे.
वैसे तो कुछ नहीं हम फिर भी हम सब कुछ है.
जिस्म है और जिस्म में अच्छी खासी रूह हें.
कभी तो तुम भी रुहसे आगे निकल आवोगे.
जब अँधेरा हुवा हें तो सवेरा भी होगा . कभी बंध,
कभी खुल्ली आंखो से दिखेगा तुम देखना जो चाहोगे.
हों जाती हें ,हम कभी भी किसीकी मदद नहीं करते हें .
हों जाती हें ,हम कभी भी किसीकी मदद नहीं करते हें .
और फिर तुम जो करते हों बस हम वही करते है.
"अनंत" उल्जे हुवे हों तुम और भी उलज जावोगे..
आके ना जा पावोगे . जा के ना आ पावोगे .
जितना दूर जावोगे . उतना पास आवोगे.
आके ना आ पावोगे जाके ना जा पावोगे ,
"अनंत"
"अनंत"

No comments:
Post a Comment