*ब्लास्ट*
"अनंत" मुजे खोजते खोजते जब तुम खो जाओगी ।
बस उसी बक्स, हां उसी वक्त हम तुम्हें, तुम्हीं मे मील जायेंगे।
"अनंत"
यहां वहां मुजे ढुंढना नहीं।
"अनंत" छुपा हुं तुम्हीं मे कहीं।
कभी आंख बंध कर के बैठना
मे तुम्हारे पास ही बैठा हुंगा।
जब कभी तुम आंख बंध करके लैटोगी,
मे "अनंत" तुम्हारे पास ही लैटा हुंगा।
"अनंत"













No comments:
Post a Comment