मै चेत कर चलता हुं।
तुं भी चेत कर चलना।
डरना वरना कुछ भी करना।
पर मुज भोले को ना छलना।
जुठ-ओ-फरेब से बचाना बचना।
मै चेत कर चलता हुं।
तुं भी चेत कर चलना।
मै चेता हुंआ हुं तु भी चेतना।
मै और मेरी "अनंत" चेतना।
जो भी तुं देगी वोही मीलेगा।
तुं मेरा सुख तुं ही मेरी वेदना।
जो चाहो सो देना और जो दो वो लेना।
मै चेत कर चलता हुं।
तुं भी चेत कर चलना।
तुं और तेरी चेतना।
मै और मेरी चेतना।
देख ना..
मेरी और देखना..!
मै ऐसा कभी कीसी को नहीं कहेता..!
क्योंकि मुजे कभी ऐसा कहेना ही नही पडा।
क्यो की सब देखते है से मुजे आंखो से।
खुल्ली आंखे धोखा खाती है।
धोखा बंध आंखो से भी होता है।
खुल्ली आंखो से भी.!
खा सकती है खुल्ली आंखे भी धोखा।
गर सीर्फ आंखो से ही जो मुजे देखा ।
गर देखना चाहो तो,
उन आंख से देखो जो दीखती नहीं है।
खेर...
गर तुम चाहो देखना।
तो आंखे बंध रखना।
मै फोरन आ जाउंगा तुम्हारे सामने।
गर तुम देखना चाहो मुजे,
तो बंध आंखो से देखना।
जीस रुप मे देखना चाहो।
देखेगी "अनंत" चेतना।
दीखेगी "अनंत" चेतना।
गर तुम चाहो देखना।
तो आंखे बंध रखना।
मै फोरन आ जाउंगा तुम्हारे सामने।
"अनंत"
ऐ मेरी चेतना।
ये मेरी चेतना।
मै और मेरी चेतना।
मे जब चाहु तुजे देख सकता हु।
मे जब देखना चाहुंगा तुजे देखुंगा।
मै चेता हुं मे ही हुं चेतना।
तुं भी चेती हे तु भी हे चेतना।
बंध आंखों से तुभ भी जब चाहो मुजे देखना।
और आंखे जब मै बंध करु।
आकर तु मेरे भीतर प्रकटना।
"अनंत"
વર્ષો પહેલાં ભાઇબંધે એની કો'ક ચહીતીને
આવું કાં'ક, કહ્યું લખ્યું હતું...
અનેક ગુઢ અર્થમાં...
મને વર્ષો બાદ મળ્યું...
જુના ઝર્રઝર્રીત કાગળીયાના ઊકેલતા...
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