"अनंत" देखो तो .! ये महोबत की उल्जने.
हमें कितनी प्यारी प्यारी तकलीफ देती हें .
हमें तकलीफ होती हें तब..!
जब वो कहती हें,
हमको ना कोई तकलीफ होती हें .
और, जब वो कहती हे हमें तकलीफ होती हें.
तब भी हमें बड़ी तकलीफ होती हें .
जाने ये कैसी उल्जने हें , महोबतकी..
ये कैसी कैसी तकलीफ देती हें .
कभी प्यारी तो कभी दिल दुखाने वाली.
कोई भी बात उनकी हमें तकलीफ देती हें.
हम ये भी चाहते हें की,
हमारे बगैर उसे भी ...!
हमारी कमी महेसुस हो .... कुछ तकलीफ हो....
और हम ये भी नही चाहते की उन्हें.....!
हमारी वजह से कोई तकलीफ हो.
आखिर क्या छुपा हें इन बातो में ऐसा ....
जो की हमें इतनी तकलीफ हें देता.....
बस यही तकलीफ समजने बार बार आनेका ...
आये तो जाने का,,, जब पाए ,, डर खोनेका ..
और खो जाये तो...! फिर खोजनेका ...
मिल जाये तो दूर पाए ....
दूर ही से नजदीक आये ...
आये मगर आ ना पाए ...
हम जाए भी तो कैसे जाए .....
सायद इसमें भी कोई सवार्थ हो हमारा ...
मगर इन्ही स्वार्थ में कोई परमार्थ छुपा हो हमारा ...
"अनंत" फिर वो सवार्थ ही कहा रहा ... ?
... ये अधूरा हें कुछ टुकड़े उसके नहीं मिले ...
और फिर कुछ ऐसा उसका लिखा गुजरती में मिला तो उसने लिखा था .....
"અનંત" સ્વાર્થ એવો હોવો જોઇયે...
જેમાં પરમાર્થ પણ છુપાયો હોય......
बस बाकी जब मिलेगा और वक्त मिलेगा तब पूरा होंगा ...
वर्ना ये भी अधूरा ही रहेंगा...
हमें कितनी प्यारी प्यारी तकलीफ देती हें .
हमें तकलीफ होती हें तब..!
जब वो कहती हें,
हमको ना कोई तकलीफ होती हें .
और, जब वो कहती हे हमें तकलीफ होती हें.
तब भी हमें बड़ी तकलीफ होती हें .
जाने ये कैसी उल्जने हें , महोबतकी..
ये कैसी कैसी तकलीफ देती हें .
कभी प्यारी तो कभी दिल दुखाने वाली.
कोई भी बात उनकी हमें तकलीफ देती हें.
हम ये भी चाहते हें की,
हमारे बगैर उसे भी ...!
हमारी कमी महेसुस हो .... कुछ तकलीफ हो....
और हम ये भी नही चाहते की उन्हें.....!
हमारी वजह से कोई तकलीफ हो.
आखिर क्या छुपा हें इन बातो में ऐसा ....
जो की हमें इतनी तकलीफ हें देता.....
बस यही तकलीफ समजने बार बार आनेका ...
आये तो जाने का,,, जब पाए ,, डर खोनेका ..
और खो जाये तो...! फिर खोजनेका ...
मिल जाये तो दूर पाए ....
दूर ही से नजदीक आये ...
आये मगर आ ना पाए ...
हम जाए भी तो कैसे जाए .....
सायद इसमें भी कोई सवार्थ हो हमारा ...
मगर इन्ही स्वार्थ में कोई परमार्थ छुपा हो हमारा ...
"अनंत" फिर वो सवार्थ ही कहा रहा ... ?
... ये अधूरा हें कुछ टुकड़े उसके नहीं मिले ...
और फिर कुछ ऐसा उसका लिखा गुजरती में मिला तो उसने लिखा था .....
"અનંત" સ્વાર્થ એવો હોવો જોઇયે...
જેમાં પરમાર્થ પણ છુપાયો હોય......
बस बाकी जब मिलेगा और वक्त मिलेगा तब पूरा होंगा ...
वर्ना ये भी अधूरा ही रहेंगा...
No comments:
Post a Comment