हर इन्सानको इस दुनियामे एक ऐसा इन्सां चाहिये.
वो जो सबको खुशीसे गले लगाले कोई ऐसा चाहिए.
हंसने हसाने के लिए तो पूरी दुनिया पड़ी हें,
रोनेके-
लिए भी हर इन्सानको एक खूब सूरत कंधा चाहिए.
मरने के बाद चार कंधे मिलते है यहाँ हर किसीको
जीते जी भी उनको एक प्यारा कंधा मिलना चाहिए.
रोये कोई इस कदर हमारे कंधे पर रखके सर अपना,
तो कंधा हमारा भी उनके आंसूओ से भीगना चाहिए..
जब किसीके आंसुकी नमी महेसुस हो हमारे कंधे को.
“अनंत हमारी आखोसे भी तब अश्क छलकना चाहिए.
“अनंत”


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