जाते जाते फिर "अनंत" का एक शेर .....
हां तो उसने लिखा हें .
वैसे उसने ये शेर अपने आपको कहा हें .
जो की अब में खुदको कहेता हु . ~~~~~~~~~~~~~~~
"अनंत मेरे होठ जब कभी मुश्कुराते हें . में अपनी आंखोको आगा कर देता हु.
की ऐ मेरी आँखे अब तैयार रहेना तुम.
कुछ ही दिनोमे वक्त रोनेका आयेगा ...
क्यु की कुछ दिनोसे मेरे होठ मुस्कुराते हें .
"अनंत"जब कभी हम कुछ पानेकी खुशीमे झूम उठते हें.
में अपने दिलको आगा कर देता हु . की ऐ मेरे दिल अब ,
तुम तैयार रहेना.! की थोड़े ही दिनोमे वक्त खोनेका आएगा...
क्युकी में प्यार मिलनेकी खुशीमे कुछ दिन बड़ी मस्तीमे जुमा हु.... चलो अब में विदा लेता हु .
तुजको सामने हें पाया ... ..में अकेलेमे. युही नहीं बड बडाया .
.jpg)
2 comments:
aagah karne se anjaam ko rok to naa paoge..
hasne ki kimmat main yaara kuch aasu to bahaoge
kehne sun ne se kuch nahi haasil..na rokne tokne se..
baarish main nikale ho...bhig to jaoge !!
हां ...
Post a Comment