सब कुछ होते हुवे भी कुछ भी नहीं.....
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बहोत ही किंमती होते हुवे भी ....
किंमत इसकी कुछ भी नहीं.....
किंमत इसकी कुछ भी नहीं.....
ये बंगला ये गाडी...
कुछ भी नहीं...
कुछ भी नहीं...
ये महेलो ये हवेली ...
कुछ भी नहीं.....
कुछ भी नहीं.....
ये ताजो ये तख्तो...
कुछ भी नहीं.....
कुछ भी नहीं.....
गोरे बदनको सजाते....
तुमने जो पहेने....
ये सोनेके गहने.....
तुमने जो पहेने....
ये सोनेके गहने.....
सोने के हे फिरभी किंमत उसकी,
कुछ भी नहीं...
कुछ भी नहीं...
कंगन, चूड़ी ,नाक की नथनी, कानो की बाली...
ये गोरासा चहेरा और होठो की लाली....
कुछ भी नहीं.....
ये गोरासा चहेरा और होठो की लाली....
कुछ भी नहीं.....
गोरे बदन पे लपेटा ये कुर्ता ओ-चुनरी....
और सितारोंसे सजी हुई चमकती सारी...
कुछ भी नहीं.....
और सितारोंसे सजी हुई चमकती सारी...
कुछ भी नहीं.....
हो प्यारा सा सोहर....
या सुन्दरी सी भिवी...
कुछ भी नहीं....
या सुन्दरी सी भिवी...
कुछ भी नहीं....
प्यारे प्यारे....
माँ के दुलारे....
ये नटखट बच्चे....
कुछ भी नहीं....
माँ के दुलारे....
ये नटखट बच्चे....
कुछ भी नहीं....
ये सारी प्यारी चीजे जानदार, बेजान....
बेजान में भी तब जाके आती हे जान...
इससे पहेले ये, सब कुछ होते हुवे भी कुछ भी नहीं....
बेजान में भी तब जाके आती हे जान...
इससे पहेले ये, सब कुछ होते हुवे भी कुछ भी नहीं....
ये सारी सुंदरता जब तक किसी दुसरेको ना लुभाए.....
अपना सबकुछ होते हुवे भी.....!
अपने बेगानोकी नजरमे ना आये......
कुछ भी नहीं.....!
अपना सबकुछ होते हुवे भी.....!
अपने बेगानोकी नजरमे ना आये......
कुछ भी नहीं.....!
ओरत से लेकर मर्दों तक...
बच्चे से लेकर बुढो तक.....
हर किसीके दिलमे....
होती हे ये तम्मना....
और इसी बात को लेकर चलता हे सारा जहा....
हो ना गर पूरी ये तमन्ना तो......!
बच्चे से लेकर बुढो तक.....
हर किसीके दिलमे....
होती हे ये तम्मना....
और इसी बात को लेकर चलता हे सारा जहा....
हो ना गर पूरी ये तमन्ना तो......!
ये सब कुछ खूब सूरत ओ-किंमती होते हुवे भी..!
इन सारी चिजोकी किंमत कुछ भी नहीं...
इन सारी चिजोकी किंमत कुछ भी नहीं...
कब तक...? कब तक...?? कब तक...???
जब तक की ये सब कोई ना देखे .... जब तक ये कोई ना देखे....
“अनंत” जब तक के ना कोई तारीफ़ करे....
और जब तक के ना कोई ये तुमसे कहे....
और जब तक के ना कोई ये तुमसे कहे....
की...!
वाह क्या चीज हे...... वाह क्या चीज हे...... वाह क्या चीज हे......
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બ્લાસ્ટ :- આ સિધ્ધી પણ ઓછી ના કહેવાય....
“અનંત” કે કોઈ જ પ્રસિધ્ધિની ઝંખના ના રહે....
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“अनंत”
“અનંત” કે કોઈ જ પ્રસિધ્ધિની ઝંખના ના રહે....
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“अनंत”

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