इश्क अनंत के जीवनकी कहानी का एहम हिस्सा हे ...
लेला मजनू शिरी फरहाद से बढ़के अनंत का किस्सा हे...
वो एक बार एक से महोबत करके मर मिटे ...
और में बार बार इश्क करता रहा...
जीता रहा मरता रहा मिटता रहा ...
बार बार महोबतसे मिलाना ...
और बार बार इश्क करना ...
मिलना फिर बिछडना ...
फिर रोना और तड़पना ...
ये सिलसिला सालो तक चलना....
और फिर बार् बार कोई चाहने वाला मिलना ...
इसे अच्छी किस्मत कहे या बुरी ..?
क्योंकी कुछ वक्त के बाद फिर तय होती थी दुरी...
हाये ये कैसी मज़बूरी ...
मिलना फिर बिछडना ...
फिर रोना और तड़पना ...
लेकिन इस बार सोचा जरा सोचके आगे बढे तो अच्छा है...
दिल का क्या हे ये तो अभी भी नन्हा मासूम सा बच्चा है...
और बच्चे का क्या है बच्चे तो बच्चे होते है...
चलते है गिरते हे संभल ते है और फिर चलते है...
बड़े बदमाश-ओ नादाँ होते है ...
छोटी छोटी बातो पर हसते रोते है ...
बच्चे तो आखिर बच्चे होते है...
बड़े हो जाए कभी तो बात और है ...
लेकिन ये मेरा दिल बड़ा होना नहीं चाहता ...
ये बच्चा था ! बच्चा है और बच्चा ही रहेगा ये....
कलम जब चलती है रुकती नहीं ...
बस चलती ही जाती है...
कलम भी पगली सी है
क्या लिखना क्या नहीं !
लिखती है बुरा या भला..
किसे अच्छा लगेगा किसे बुरा ...
सोचती नहीं...
बस लिखती जाती है लिखती जाती है लिखती ही जाती है...
थकती नहीं...
और फिर बात कहा से कहा निकल जाती है...
मुझे पता तक होता नहीं ...
लिखने से पहेले में कभी सोचता नहीं ...
अब फिर कोई अपनी चाहत अपनी मर्जीसे आये ...
तो भला हम क्या करे ! कहा जाए ..!
इश्क हो जाए उससे पहेले ...
किसीसे इश्क करने से पहेले ...
कुछ हद तक खुद बचने की कोशिश करे और....
उन्हें भी बच निकलने के रास्ते बताये...
लेकिन ...
ये इश्क कम्माल है...
"अनंत" कोण बचा है भला इस इश्के चुंगाल से ...
चलो फिर इस बच्चे को हम भी छोड़ देते है अपने हाल पे ...
गर रोज युही बाते करेंगे तो चाहत भी बढ़ जायेगी...
फिर तो हमें एक दुसरे की आदत सी पड़ जायेगी...
गर चाहत जो बढ़ जायेगी और आदत जो पड़ जायेगी तो ...
जानती हो तुम क्या क्या होगा ?
बात जब ना हो पाएगी तब हाल कुछ ऐसा होगा..?
दिल किसी और बातमे ना लगेगा दिनभर बैचेनी होगी...
रातको नींद ना आएगी और भौर तलक जागना होगा...
सच सच बताते हे तुम्हे...
इन हालातो से यार हम कई बार गुजरे हे...
सच मानो ईसी कारण हम इश्क से परे है...
हां हां हम इश्क करने से बहोत ही डरे हे...
गर रोज रोज बाते हो तो, बात कुछ और है...
गर रोज रोज बाते हो तो, बात कुछ और है...
फिर तो हस्ते खेलते दिनभी बीत जाएगा और रात भी बीत जायेगी...
“अनंत” और दूर तलक साथ रहा तो सारी उम्र इश्क में कट जायेगी...
लेकिन अगर कसी वजे से जुदा होना पड़ा तो...?
फिर मुझे और तुजे पहेले पहेले की तरहा रोना पड़ा तो ...?
लेकिन अगर कसी वजे से जुदा होना पड़ा तो...?
फिर मुझे और तुजे पहेले पहेले की तरहा रोना पड़ा तो ...?
चलो फिर तुम कहेती हो तो फिर एक बार हम सोचलेते है ...
"अनंत" में तो कहेता हु फिर किस्मत पर सब कुछ छोड़ देते है ..
आगे जो होगा देखा जाएगा ...
वक्त हसाएगा तो हंस देगे ....
वक्त रुलाएगा तो रो लेंगे ....
और क्या..!
"अनंत"
उम्र भर मिटती नहीं "अनंत" ये दो भूख ..!
एक प्रेमी की इच्छा और दूजी प्रेमी से हूंफ ..!
"अनंत"

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