उस वक्त जब कभी हम तिन यार ....
देर रात के बाद खंडर में मिला करते थे ....
और इधर उधरकी बहोत सारी बाते किया करते थे ...
ऐसा नहीं की जब कभी हम तीनो मिलते ,
हर रात बस बाते ही बाते करते,
कुछ रात ऐसी भी कटती थी जब कोई बात नहीं होती थी ...
जब कोई बात नहीं होती थी ,
तब भी कोई बात होती थी ...
आज भी कोई बात है !
जब बाते नहीं होती थी
तब बात कुछ और ही हुवा करती थी ...
ऐसे वक्तमे हम खामोश हो जाते थे ...
और ...
हमारी खामोशी बोला करती थी ...
फिर अपनी अपनी कुर्शी संभाले हुवे,
और चाय पीते पीते ,
हम चुप चाप घंटो बेठे रहेते थे ...
यु ही बैठे बैठे कुछ पुरानी बाते .
जब कभी याद आ जाती दिल कुछ भारी भारी सा हो जाता था
तब हम तीनो चुपचाप बस कुछ ऐसे गीत सुनते रहेते थे ...
जिसे सुनते सुनते कभी कभी आँखे हमारी छलक जाती थी ..
और फिर थोड़ी देर को दिल और भी भारी हो जाता था ...
फिर कुछ हलकास हम महेसुस करते थे ...
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कुछ नग्मे जो सिर्फ ओरत की आवाजमे ही बनाए और गाये गए है ...
ऐसे कुछ गीत जिसमे जझबात हम मर्दों के भी छुपे होते है ...
अब हर वक्त हर हालमे खुदके शब्द तो सहारे नहीं देते ...
कभी कभी और शायरोके लब्झ भी हमें चेन ओ सुकून देते है ...
क्योकि उन शब्दों में जझ्बात हमारे छुपे होते है ...
गीत और संगीत से हमें जीवनमे बड़ा सहारा मिलता है...
ऐसे गीत जो सिर्फ ओरत की आवाजमे हो ,
हम ऐसे गीतों की धुन सुना करते थे उस वक्त भी !बस ऐसे ही ...
जैसे आज में अकेला सुन रहा हु ...
उस वक्त बड़ा ही मुश्किल होता था ऐसे गीतों को खोजना
आज बहोत ही आसान हो गया है
ऐसे गीत और संगीत को हांसिल करना...
ख़ैर ...
आज की रात फिर सिर्फ संगीत की सफ़र करते करते हो गई सहर..
और ऐसे गीतो की धुन सुनते सुनते कुछ और गीत अपने आप याद आ जाते है ...
दिलो दिमाग पर छा जाते है ..
जो हम उन जमाने में भी कभी सुनते गाते थे ...
शर्मा जी ...
हम आपका शुक्रिया अदा करते है ...
आपकी बासुरिकी धुन सुनके हमें बड़ा अच्छा लगा ...
भारी दिल कुछ हलका हुवा ...
और शुक्रिया अदा करते हुवे हम कुबूल करते है की,,,
बिना आपकी इजाजत लिए
आपकी बासुरिकी धुन को हम यहाँ चुरा लाया हु ...
इस लिए क्षमा चाहता हु ...
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