बर्षों पहले...
जहां मीलता था वो अपनी चहीती से,
अब वहां मीलन होना मुमकिन न था।
ईस लीए अनंत ने अपनी चहीती को
ईशारो ईशारो मे ऐसा कुछ कहा था।
*ब्लास्ट *
वहां अब मीलना ना होगा "अनंत"
अब तुम मीलना चाहो तो,
मीलेंगे हम यहां,
आप जब कभी चाहे यहां आईये।
मेरे ईशारो को समजदार चाहीये।
"अनंत"
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