નથી થવુ મારે સેલી કે બ્રીટી...
હું બુરો ને મારો ખુણો ને ખંડેર ભલા
ને ભલા મારા ભાઈબંધો...
*બ્લાસ્ટ*
वक्त बीतते लोग कितने बदल जाते है।
"अनंत" कल तक जो पीछे पीछे आते थे।
वो आज गर सामने भी आये तो मुह मोड लेते है।
कलतक जो पीछे पीछे आते थे "अनंत"
वो आज पीछा छुडा के भागते है।
खैर...
अपना हो या गैर
खुदा करे सबकी
खैर...
"अनंत"
*ब्लास्ट*
कोई उसे कलाकार माने या ना माने।
लेकिन,
अपने आप मे कलाकार होता है हर एक शख्स।
क्या फर्क पड़ता हे,
कोई स्वीकार करे या ना करे।
बोले कोई लब्झ
या लीखे कुछ भी.!
साहित्य हो जाता है
"अनंत" का हर शब्द ।
"अनंत"

















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