ते दि' नी माफकज पीन चोंटी गै
धोधो फरी एक गीत पर अटक्यो ...
धोधो फरी एक गीत पर अटक्यो ...
केटलाय दि' थ्या धोधी पुछ पुछ करती हती !
एने धोधाने कै कहेवु पण हतु ,
एने धोधाने कै कहेवु पण हतु ,
पण या तो शरमाती हती या डरती हती !
डर के शरम ? खबर नै ...
डर के शरम ? खबर नै ...
कदाच धोधानुय एवुज !
धोधानेय मनमा डर तो खरोज के जो हंमेशनी जेम कै बफाय जशे ने धोधी पछीथी आवती जती बंघ थै जशे तो ...
एवु नै के धोधी नहोती कहेती ...
कहेती पण हती, पण धोधो समजतो नहोतो !
पछी एक दि' अचानक धोधाने समज फुटी !
पण कहेवु कै रीते ? धोधो मु़जायो ....
हवे धोधो कै लेखक के शायर तो हतो नै ,
के लखीने ने कहे !
के लखीने ने कहे !
हाथवगु हथीयार हतु एक मात्र उछीना शब्दो के पछी मघुर गीत !
प्रीय पात्र साथे पोतानी लागणी व्यक्त करवा
हंमेशा माणस मात्र !
जो खुद साहीत्यकार होय तो ,
पोताना नै तो पारका शब्दोनो सहारो ले छे !
काय ना मले तो कोई गीत !
शुरु ये शीलशीला तो उसी दीनसे हुआ हे !
जबसे कीसीने कीसीकी रुहको छुवा हे !
जबसे कीसीने कीसीकी रुहको छुवा हे !
बस आज कारणे ....
गीत संगीतनी दुनीया सदा बहार छे !
बौ शोघ ना अ़ते धोधाने एक गीत जड्यु
पण हजु आखु गीत याद नहोतु आवतु ....
एटले तेदि'नी जेमज आम तेम आंटा मारे छे ने गणगणे छे !
कस्तीका खामोश सफर हे
शाम भी हे तनहाई भी ,
शाम भी हे तनहाई भी ,
दुर कीनारे पर बजती हे ,
लहेरोकी शहनाई भी !
लहेरोकी शहनाई भी !
आज मुजे कुछ कहेना हे ,
आज मुजे कुछ कहेना हे
आज मुजे कुछ कहेना हे
बस अहीथी पीन चो़टी गै...
अने धोधी .....



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