"अनंत"पीके तो यु ही डगमगाते हे कदम अकसर..
लडखडाये दिल अगर किसी की आँखों में झाँक कर..
तो समजो तुम उसके प्यार में हो...
आँखे खुल्ली हो या बंध वो ही वो सामने आये नजर...
बिस्तर पर सोते वक्त तकियेमे वो नजर आये अगर...
कंधे पे उसके सर रखके रोने को जी चाहे और सो जाए .
सुबह जब आँख खुले और तू तकिये को गिला महेसुर कर ...
तो समजो तुम उसके प्यार में हो...
दिन तो गुजर जाए बाकी कामो के बोज तले जैसे तैसे ...
पर रात लंबी लगे ऐसे जेसे उसके आने का हो इन्तजार...
थका पका जिस्म जब बिस्तर पर गिरे और फिर धीरे धीरे..
बंध आंखोमे जागे सपने और झांके दर पर नजर बार बार ...
तो समजो तुम उसके प्यार में हो...
"अनंत"

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