ए वायडीनो तो हतोज जो के !
वर्शो पहेलानी वात छे !
एक दि' बन्यु एवु
के ...
शु बन्यु ?
ए मारे नथी के'वु !
पण ए बनाव जे पण बन्यो तारे शु एमा !
हु नै कौ एटलै नैयज कौ !
ते दि' आम गुस्से थै एणे एनी चहीतीने ,
जे वात कही 'ती ए ,→_→→_→
→_→आ रही →_→
→_→→_→
हु जो खोटु बोलु तो तु साचु मानी जाय छे !
अने साचु बोलु तो तने माठु लागी जाय छे !
अने साचु बोलु तो तने माठु लागी जाय छे !
"अनंत" एटले ज हवे हु कशु बोलवानो नथी.
तु लाख प्रयास करे ! हु मो , खोलवानो नथी.
तु लाख प्रयास करे ! हु मो , खोलवानो नथी.
"अनंत"
जो के ए पछी तो ए बंने केटलाय दिवस सुघी ना बोल्या बंनेनु मलवानु ओछु थै ग्यु !
पछी ज्यारे बेउथी एक बीजा वीना ना रहेवायु एटले पछी मल्या !
पछी बौ लड्या जगड्या ....
पेलीये तो चींटीयाय खुब भर्या !
पेला ना गाल पर ...
ने पछी ,,,
प्रेम थी जे लडे ,
प्रेम थी जे लडे ,
ए रडे तो खराज ने !
ए पण रड्या ....
ब्लास्ट :-
अंत ए शरुवात समजवी 'अनंत' पछी ते,
प्रेम होय ,वार्ता होय, जीवन हो' के म्रुत्यु !
प्रेम होय ,वार्ता होय, जीवन हो' के म्रुत्यु !
"अनंत"
जोके ए चीत चोर हतो !
'ने हु चीत्र चोर ....
बस एटलोज फेर ...:)



No comments:
Post a Comment