બધ્ધુ પહેલેથી જ તૈ થૈ ગયું છે.!
અમુક અમુક ચુનંદા લોકો, આ અવની પર અવારનવાર
આવતા હોય છે.!
તેથીજ આવનારા સમયમાં સારૂ ખરાબ શું શું થવાનું છે.
જાણતા હોય છે.!
એમાં ના ઘણા સાહિત્ય કારો કલાકારો પણ હોય છે.!
અકલે, એને પેલ્લેજ ખબર હોય બધ્ધીજ્જ..!
हे..रामचंद्र कह गए सिया से (2)
ऐसा कलयुग आएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का (2)
कौआ मोती खाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा
हे जी रे..
रामचंद्र कह गए सिया से (2)
ऐसा कलयुग आएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का (2)
कौआ मोती खाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा
रामचंद्र कह गए सिया से..
सिया पूछे भगवानकलयुग में धर्म – कर्म कोकोई नहीं मानेगातो प्रभु बोले
धर्म भी होगा कर्म भी होगा (2)
लेकिन शर्म नहीं होगी
बात बात में मात-पिता को (2)
बेटा आँख दिखाएगा…
हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा…
हे रामचंद्र कह गए सिया से..
राजा और प्रजा दोनों मेंहोगी निसिदिन खेचातानी खेचातानी…
कदम कदम पर करेंगे दोनोंअपनी अपनी मनमानी मनमानी…
जिसके हाथ में होगी लाठी (2)
भैंस वही ले जाएगा…हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा… (2)
हे रामचंद्र कह गए सिया से..
सुनो सिया कलयुग मेंकाला धन औरकाले मन होंगेमन होंगे..
चोर उच्चक्के नगर सेठऔर प्रभु भक्त निर्धन होंगे..निर्धन होंगे…
जो भी होगा लोभी भोगी (2)
वो जोगी कहलाएगा..
हंस चुगेगा दाना तुन का (2)
कौआ मोती खाएगा..
हंस चुगेगा दाना तुन काकौआ मोती खाएगा…
हे रामचंद्र कह गए सिया से..
मंदिर सूना सूना होगाभरी रहेगी मधुशालामधुशाला…
पिता के संगसंग भरी सभा मेंनाचेगी घर की बाला…घर की बाला…
हे.. कैसा कन्यादानपिता हीकैसा कन्यादानपिता ही…कन्या का धन खा जाएगा
हंस चुगेगा दाना तुन का (2)
कौआ मोती खाएगा…
हंस चुगेगा दाना तुन का
कौआ मोती खाएगा…
हे मूरख की प्रीत बुरीजुए की जीत बुरी
बुरे संग बैठ ते भागे ही भागेहे काजल की कोठरी में कैसे ही जतन करो
काजल का दाग भाई लागे ही लागे रे भाईकाजल का दाग भाई लागे ही लागे
हे जी रे…
कितना जती को कोईकितना सती हो कोईकामनी के संग कामजागे ही जागे..
ऐ सुनो कहे गोपीरामजिसका है नाम कामउसका तो फंद गले लागे ही लागे रे भाई
उसका तो फंद गले लागे ही लागे..
| फिल्म | गोपी |
| वर्ष | 1970 |
| गायक / गायिका | राजेन्द्र कृष्ण |
| संगीतकार | महेंद्र कपूर |
| गीतकार | कल्याणजी आनंदजी |
| अभिनेता / अभिनेत्री | दिलीप कुमार, सायरा बानो, ओम प्रकाश, प्राण |
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